Crossdressing story Hindi || पती बना सहेली...



मेरा नाम प्रतीक है और मैं एक कंपनी में नौकरी करता हूँ। मेरी शादी को एक साल हो चुका है और मेरी पत्नी का नाम ज्योति है। हम दोनों हमेशा से बेस्ट कपल रहे हैं। ज्योति हमेशा मुझे खुश रखती है, लेकिन एक दिन वह बहुत उदास थी। मैंने पूछा, "क्या हुआ?"  


वह बोली, "कुछ नहीं।"  


मैंने कहा, "बताओ, मैं तुम्हारा पति ही नहीं, दोस्त भी हूँ।"  


तब वह बोली, "वही तो... मेरी सबसे अच्छी दोस्त की शादी हो गई और वह विदेश सेटल हो गई। अब यहाँ मेरी कोई दोस्त नहीं है।"  


मैंने कहा, "तो क्या हुआ? मैं हूँ न!"  


ज्योति ने कहा, "लेकिन मुझे एक औरत दोस्त चाहिए जो मेरे साथ औरतों वाली बातें कर सके, मेरी भावनाएँ समझ सके।"  


मैंने कहा, "तो क्या तुम मुझसे खुलकर बात नहीं कर सकतीं?"  


ज्योति ने मुस्कुराते हुए कहा, "अच्छा जी, हाँ... तो..."  


यहीं प्रतीक की गलती हो गई। उसने कहा, "ठीक है, तो चलो, अब से मैं तुम्हारी दोस्त बन जाता हूँ। तुम मुझसे सारी बातें शेयर कर सकती हो।"  


ज्योति खुश हो गई। अगले दिन ऑफिस से आने के बाद वह बोली, "चलो, मेरे साथ शॉपिंग करो।"  


मैं थक गया था, लेकिन ज्योति ने जिद की, "तुमने कहा था मेरी दोस्त बनोगे, और अब मना कर रहे हो?"  


मैं मजबूर होकर उसके साथ शॉपिंग पर चला गया। वहाँ ज्योति ने मुझसे साड़ियाँ चुनवाईं, ब्लाउज पसंद करवाए और कई औरतों वाली चीज़ों में मेरी राय ली। धीरे-धीरे मैं उसके साथ ज्यादा फेमिनिन होता गया। मैं औरतों की तरह बातें करने लगा, उनकी तरह चलने-फिरने लगा। ज्योति का कामो मी हात बटाने लगा उसकी साडीया ज्वेलरी ये सब मै उसकी हेल्प करने लगा उसके साथ ये सब बाते करने लगा और मेरे हवा भाव मेरी चाल चलन सब बदल रहा था... और ऐसेही कभी-कभी अकेले में मैं खुद को मेकअप भी करने लगा।  


एक दिन ज्योति ने मुझे मेकअप करते देख लिया। मुझे लगा वो गुस्सा करेगी लेकिन वो वह हँसी और मुझे साड़ी पहनने को कहा। मैं शुरू में हिचकिचाया, लेकिन फिर मान गया। धीरे-धीरे दिन गुजरते गये मे साड्या ड्रेसेस पहने लगा और ज्योती के साथ उसकी सहली बनके रहने लगा ऐसेही साल के अंदर मैं पूरी तरह से औरत की तरह रहने लगा। और ज्योति के साथ साडी पेहन कर बहार भी जाने लगा ने मुझे "पुष्पा" नाम दे दिया और मुझे अपनी सहेली की तरह ट्रीट करने लगी।  



एक दिन की बात है, मैंने एक पुरानी साड़ी पहन रही थी । ज्योति बोली, "पुष्पा, यह साड़ी का ब्लाउज बहुत ओल्ड फैशन है, कोई दूसरी पहनो।"  


मैंने कहा, "नहीं, मुझे यही पसंद है।"  

और वैसे भी पुष्पा ने कहा, "मैं जानती हूँ, इसलिए मैंने मेरे लिए नई फैशन का साड़ी ब्लाउज सिलवा लिया है।"  





ज्योती चौंक गई, "तुम कब गईं? आजकल तुम बहुत ज्यादा घूम रही हो। कहीं तुमने बॉयफ्रेंड तो नहीं बना लिया?"  


ज्योति हँसी, "अरे, तुम भी न! और देखो, कैसे शरमा रही हो, जैसे सच में बॉयफ्रेंड बना लिया हो!"  


मैं घबरा गया, "अरे, बस करो!"  


लेकिन ज्योति को शक हो गया। कहीं सच में उसका पति, जो अब पुष्पा बन उसके सहली बनके उसके साथ जाता था, किसी और के साथ तो नहीं? उसने एक प्लान बनाया। उसने अपने एक दोस्त से कहा कि वह उसका फेक बॉयफ्रेंड बनकर पुष्पा के सामने आए।  


एक दिन ज्योति और मे गये कॉफी शॉप में गए, जहाँ पुष्पा (यानी मैं) भी थी। ज्योति ने कहा, वापर एक हँडसम बॉय से मिली "पुष्पा, यह मेरा बॉयफ्रेंड है, शॉक हो गई।"  


मुझे झटका लगा। मेरी अपनी पत्नी का बॉयफ्रेंड? लेकिन अब मैं खुद साड़ी पहने, उसकी सहेली बनकर घूम रहा था, तो कुछ बोल भी नहीं सकता था। मैं चुपचाप बैठी रही।  


तभी ज्योती की बॉयफ्रेंड ने पूछा, "ज्योति, तुम्हारी यह सहेली बहुत हॉट है। इसका कोई बॉयफ्रेंड है?"  


ज्योति ने कहा, "तुम ही पूछो।"  


शॉक होकर मेरी तरफ देखा, "पुष्पा, तुम्हारा कोई बॉयफ्रेंड है?"  


मैं घबरा गई, लेकिन फिर बोली, "हाँ... है।"  


ज्योति की आँखें चौड़ी हो गईं। क्या सच में पुष्पा का कोई बॉयफ्रेंड था? या फिर यह सब एक नाटक था?  


ज्योति ने जब पुष्पा के मुंह से सुना कि उसका भी कोई बॉयफ्रेंड है, तो उसकी आँखें फैल गईं। वह चौंक गई, "क्या? तुम्हारा भी बॉयफ्रेंड है? कौन है वो?"  


पुष्पा (प्रतीक) ने हिचकिचाते हुए कहा, "हाँ... वो हमारा पड़ोसी है... रोहित।"  


ज्योति ने गहरी सांस ली। उसे लगा कि शायद यह सब एक मजाक है, लेकिन पुष्पा की आँखों में झलकती शर्म और खुशी ने उसे हैरान कर दिया। 


दरअसल, जब से प्रतीक ने पुष्पा का रूप लिया था, उसके पड़ोस में रहने वाले रोहित ने उसे एक दिन साड़ी में देखा था। पहले तो वह हैरान हुआ, लेकिन फिर उसे लगा कि शायद यह कोई नई लड़की है। धीरे-धीरे उसने पुष्पा को नोटिस करना शुरू किया। एक दिन जब पुष्पा अकेले पार्क में बैठी थी, रोहित ने उसके पास आकर बातचीत शुरू की।  


"तुम नई हो यहाँ?" रोहित ने पूछा।  


पुष्पा ने हल्की सी मुस्कुराहट के साथ सिर हिलाया, "हाँ... मैं ज्योति की दोस्त हूँ।"  


रोहित को पुष्पा की मासूमियत और सौम्यता पसंद आई। कुछ हफ्तों तक वह उससे मिलता रहा, और फिर एक दिन उसने पुष्पा को प्रपोज कर दिया।  


"पुष्पा, मुझे तुमसे प्यार हो गया है। क्या तुम मेरी गर्लफ्रेंड बनोगी?"  


पुष्पा पहले तो घबरा गई, लेकिन फिर उसने हाँ कह दिया। अब वह रोहित के साथ डेट्स पर जाने लगी, मूवीज देखने लगी और धीरे-धीरे उसके लिए वाकई एक औरत बन गई। लेकीन उसने अपनी पेहचान चीपाये रखी...


मुझे लगा ही इसीलिए मैंने यह प्लान बनाया था कि तुम सच मुझे बता दो यह मेरा बॉयफ्रेंड नहीं मेरा दोस्त है पुष्पा ने शौक में कहां तुम्हें कैसे पता चला ।..


ज्योति मुझे लगा कि पुष्पा कुछ छुपा रही है। इसलिए एक दिन मैने तुम्हारी मोबाईल खोलकर देखी, जिसमें रोहित के नाम प्यार भरे मैसेज लिखे थे। ज्योति को गुस्सा आया, लेकिन फिर उसे एहसास हुआ कि यह सब उसी की वजह से हुआ था।  


पुष्पा ने डरते हुए कहा, "ज्योति... मैं... मैं ..."  


ज्योति ने गंभीर होकर कहा, "सच बताओ और क्या-क्या किया, वरना मैं रोहित को सब बता दूँगी कि तुम असल में कौन हो!"  


पुष्पा की आँखों में आँसू आ गए। उसने सारी बातें स्वीकार कर लीं।  


ज्योति का रिएक्शन 

ज्योति पहले तो गुस्से में थी, लेकिन फिर उसने सोचा कि यह सब उसी के कारण हुआ है। उसने पुष्पा को गले लगाते हुए कहा, "माफ़ करना, मैंने तुम्हें ऐसा बना दिया। लेकिन अब हमें इस स्थिति को सुलझाना होगा।"  


पुष्पा ने पूछा, "कैसे?"  



ज्योति ने कहा, "रोहित को सच बताना होगा।"    

अगले दिन ज्योति और पुष्पा ने रोहित को बुलाया। पुष्पा ने अपने असली रूप में आकर कहा, "रोहित... मैं प्रतीक हूँ, ज्योति का पति।"  


रोहित को विश्वास नहीं हुआ। वह गुस्से में बोला, "यह क्या मजाक है?"  


लेकिन जब प्रतीक ने अपने बाल खोलकर और कपड़े बदलकर दिखाए, तो रोहित स्तब्ध रह गया। वह चिल्लाया, "तुमने मेरे साथ धोखा किया!"  


ज्योति ने समझाया, "यह सब मेरी गलती थी। मैंने ही प्रतीक को ऐसा बनाया।"  


रोहित ने कुछ देर सोचा, फिर मुस्कुराते हुए बोला, "तो क्या... अब मैं तुम दोनों का दोस्त बन सकता हूँ?"  


सब हँस पड़े।  


क्या सच में प्रतीक फिर से साड़ी नहीं पहने गा?

क्या ज्योति फिर से अपनी दोस्त खो देगी ??

क्या रोहित अपने प्यार को फिर से पा पायेगा??


और आगे की स्टोरी क्या होनी चाहिए. क्या प्रतीक को पुष्पा बनकर रोहित के साथ जाना चाहिए या फिर हमेशा के लिए पुष्पा बन जाना चाहिए फिर ज्योति का क्या होगा और ज्योति का दोस्त वह हैंडसम..


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